वीआईपी संस्कृति से पीड़ित एक आम भारतीय नागरिक का सवाल ।
दिल्ली/5 फरवरी

ये घटनाएं बेहद शर्मनाक है।
मैं भी इस तरह की घटनाओं से वाक़िफ हूँ, दिल्ली के धौला कुआँ पर अक्सर आपको इसकी झलक मिलेगी, पर शुभम गुप्ता के साथ जो हुआ वो आपके साथ भी हो सकता है।

बकौल शुभम गुप्ता,

माननीय प्रधानमंत्री महोदय, 
जैसा कि आप अपने भाषणों में कई बार कहा है कि मैं आपका सेवक हूँ और मैं भारत के लोगों के प्रति विशेषतय: गरीब लोगों के प्रति समर्पित हूँ। आप कहते हैं कि हमारी सरकार वीआईपी संस्कृति के विरुद्ध है।
रविवार (5 फरवरी) को जब मैं साकेत मेट्रो से घर की तरफ जा रहा था, उस समय एक से दो वीआईपी कार के लिए आधे घन्टे से ज़्यादा ट्रैफिक रुकवाया गया। ट्रैफिक लाइट्स बंद कर दी गईं क्योंकि एक वीआईपी महापुरुष को निकलना था।
ट्रैफिक लाइट्स बंद होने के कारण बहुत लंबा जाम लग गया था। कमाल की बात यह थी कि आज तक ट्रैफिक नियंत्रण के लिए मैंने दिल्ली पुलिस को नहीं देखा लेकिन आज वह ट्रैफिक पुलिस के साथ वीआईपी की खिदमत करने में लगी हुई थी।
हमारे पीछे एक एम्बुलैंस भी थी और एक अंकल भी जिन्हें कहीं बहुत जल्दी पहुंचना था लेकिन वीआईपी की कार के लिए हम लोगों को आधे घंटे इंतज़ार करना पड़ा। जब मैं एक ट्रैफिक अधिकारी से पूछने गया कि जाम क्यों लगा हुआ है तो उन्होंने मुझे जबाव देने से इन्कार कर दिया और उन्होंने कहा कि हटो यहाँ से, मुझे अपना काम करने दो।
मुझे यह समझ नहीं आ रहा है कि हम लोकतान्त्रिक देश में रह रहे हैं या एक सामंती राष्ट्र में, जहां राजा और नेता वर्ग का विशेष स्थान होता है।
जब मैंने एक भारतीय नागरिक के तौर पर पुलिस से बार-बार सवाल किया कि ट्रैफिक जाम क्यों है कब तक खुलेगा? तो उन्होंने मुझे फिर भी जबाव नहीं दिया। इसके बाद जब गाड़ियां निकल गयीं तब सारे पुलिस वाले मेरे पास इकट्ठे हो गए।
उसके बाद भी मैंने यही प्रश्न पूछे लेकिन इस बार पुलिस और ट्रैफिक पुलिस का अंदाज़ बदला था। कुछ पुलिस वालों ने मुझे पीटने और थप्पड़ मारने की धमकी दी। जब मैंने बोला कि एक सरकारी कर्मचारी होने के नाते आपको यह हक़ नहीं दिया गया है।
इसके बाद, एक पुलिस वाले ने मुझे जबरदस्ती घसीटा और मुझे थाने में बंद करने की धमकी देने लगे। मैं तब भी लगातार सवाल पूछता ही रहा, उसके बाद एक पुलिस वाले ने कहा कि दिखने में तू ठीक लग रहा है, चुप चाप चला जा। मुझे फिर से धमकियाँ दी गईं।
मैंने जब उनसे यह सवाल पूछा कि एम्बुलैंस की स्थिति में भी आप यही करेंगे तो उनका जबाव था चाहे कोई भी हो, जब तक वीआईपी गाड़ी नहीं निकल जाती, ट्रैफिक रुका रहेगा। ऊपर से आदेश होते हैं।
मैंने इसके लिए प्रधानमंत्री कार्यालय को एक शिकायत भी भेजी है और मैं उम्मीद करता हूँ कि वे इस पर कोई कार्रवाई ज़रूर करेंगे। वास्तविकता में भी, इस संस्कृति के खिलाफ कार्यवाही की जाए, ऐसा देश का हर एक नागरिक चाहता है।
हम सभी लोग इस संस्कृति से तंग आ चुके हैं। लोगों को सवाल पूछने पर कानून के नाम पर डराया-धमकाया जाता है, ऐसे में व्यवस्था में कैसे पारदर्शिता रहेगी? 
एक भारतीय नागरिक होने के नाते आप से यह सवाल पूछना चाहता हूं कि देश में आम जन महत्वपूर्ण हैं या नहीं? या शक्ति का सारा केंद्र आप नेताओं और लाल-नीली बत्ती वालों के पास रहेगा?

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